मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन नारी सम्मान, मर्यादा और धर्म के आदर्शों का प्रतीक है, जो आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने नारी गरिमा की रक्षा का संदेश दिया और उनका जीवन वर्तमान समय के लिए मार्गदर्शक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता में श्रीराम का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा, जिसके डीएनए में भारत हो और वह श्रीराम को न मानता हो।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने रामायण काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय नकारात्मक शक्तियों ने समाज में अशांति और अव्यवस्था फैला रखी थी। उन्होंने कहा कि जब भी ऐसी शक्तियां सक्रिय होती हैं, वे विनाश का कारण बनती हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर दोनों के बीच संक्षिप्त वार्ता भी हुई। श्रीरामकथा का मंगलवार को नौवां और अंतिम दिन था।
इससे पहले रामभद्राचार्य ने कथा के दौरान महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में पत्नी केवल जीवनसाथी नहीं, बल्कि धर्म पालन की सहभागी होती है। उन्होंने कहा कि मां का स्थान सर्वोच्च है और महिलाओं के योगदान के बिना परिवार, समाज तथा राष्ट्र की कल्पना अधूरी है।


