उत्तर प्रदेश विधानसभा का चार दिवसीय मानसून सत्र हंगामे और तीखी बहसों के बीच खत्म हुआ। पहले दो दिन विपक्ष ने नेता प्रतिपक्ष के अपमान और फतेहपुर मजार विवाद पर हंगामा कर कार्यवाही बाधित की, जबकि आखिरी दो दिन "विजन डॉक्यूमेंट 2047" पर चर्चा हुई।चर्चा में 189 विधायकों-मंत्रियों ने हिस्सा लिया, लेकिन 95% यानी 181 माननीय कोई ठोस सुझाव नहीं दे पाए और एक-दूसरे की खामियां गिनाने में ही लगे रहे। कुछ मंत्रियों और विधायकों के बयान और नोकझोंक सुर्खियों में रही जैसे जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का "बीवी की कसम" वाला मजाक और मत्स्य मंत्री संजय निषाद का फूलन देवी हत्या पर सपा पर आरोप।
सीएम योगी ने 2 घंटे 36 मिनट के भाषण में 2017 से अब तक की उपलब्धियां और 2047 तक के विकास का रोडमैप पेश किया। विपक्ष ने सरकार को अधूरे वादों पर घेरा, लेकिन ठोस योजना कम ही सामने आई। सत्र में कुल 2366 सवालों में से केवल 41 तारांकित प्रश्न ही शामिल हो सके और 10 विधेयक पास हुए, जिनमें "श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश-2025" भी शामिल है।कुल मिलाकर, 31 घंटे 45 मिनट तक चले इस सत्र में बहस तो खूब हुई, लेकिन "विकसित यूपी" के लिए स्पष्ट रोडमैप पर सहमति कम दिखी।
