महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के भूम तालुका में पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की संयुक्त कार्रवाई में सिंथेटिक दूध के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि पिछले छह महीनों के दौरान लाखों लीटर नकली दूध तैयार कर उसे असली दूध में मिलाकर महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में बेचा गया। इस मामले ने खाद्य सुरक्षा और लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर हुई छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने आरोपियों के ठिकानों से 61 बोरी मिलावटी दूध पाउडर जब्त किया। जब्त किए गए बिक्री रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच में पता चला कि आरोपियों ने करीब 2,30,470 किलोग्राम घटिया गुणवत्ता के मिल्क पाउडर का उपयोग कर लगभग 23,04,070 लीटर सिंथेटिक दूध तैयार किया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 9 करोड़ 21 लाख 62 हजार 800 रुपये बताई गई है।
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जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी हर 100 लीटर शुद्ध दूध में लगभग 10 लीटर सिंथेटिक दूध मिलाते थे। इसी आधार पर अनुमान लगाया गया है कि पिछले छह महीनों में भूम क्षेत्र के दूध संग्रह केंद्रों से 2.3 करोड़ लीटर से अधिक मिलावटी दूध महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया गया हो सकता है। नकली दूध को असली जैसा दिखाने के लिए डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल और घटिया रासायनिक पाउडर का इस्तेमाल किया जाता था। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दूध का लगातार सेवन करने से लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। यह बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से खतरनाक माना जा रहा है।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरा कारोबार पशु आहार बेचने की आड़ में चलाया जा रहा था। प्रारंभिक जांच के अनुसार बालासाहेब गोडगे नामक व्यक्ति कई डेयरियों तक मिलावटी दूध पाउडर पहुंचा रहा था। मामले में कई स्थानीय दूध संग्रह केंद्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जबकि मिलावटी दूध खरीदने वाले डेयरी संचालकों की पहचान की जा रही है।
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इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है और लगातार छापेमारी की जा रही है। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।



