रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के अंतिम दिन राज्याभिषेक के अवसर पर पारंपरिक भोर की आरती का आयोजन किया गया। सूर्योदय से पहले अयोध्या मैदान में संपन्न इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। घंटा-घड़ियाल, शंखनाद और महताबी की रोशनी के बीच पूरा लीला स्थल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
परंपरा के अनुसार काशीराज महाराज डॉ. अनंत नारायण सिंह रामनगर किले से नंगे पैर लीला स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने जमीन पर बैठकर प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी का तिलक किया। इसके बाद माता कौशल्या के स्वरूप और रामायणी दल ने पारंपरिक विधि से राम दरबार की आरती उतारी। इस दौरान 'श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन' के गायन के साथ 'राजा रामचंद्र की जय' और 'जय श्रीराम' के उद्घोष से अयोध्या मैदान गूंज उठा।
भोर की आरती रामनगर रामलीला की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। आरती के बाद भगवान श्रीराम द्वारा गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से वानर-भालू सेना, सुग्रीव, विभीषण और अंगद को उचित सम्मान व उपहार देकर विदा करने की लीला संपन्न हुई। इसके साथ ही रामनगर की 31 दिवसीय रामलीला के समापन की परंपरा पूरी हुई।


