अखिल भारतीय सनातन समिति जैतपुरा द्वारा आयोजित रामकथा के छठवे दिन अपने प्रवचन में पूज्य बालक दास जी महाराज मानस मराल ने कहा कि शिव जी के धनुष टूटने पर जो आकाश में गर्जना हुई इसे सुनकर स्वयंवर स्थल पर मुनिराज परशुराम जी बड़े ही क्रोध में आकर उन्होंने राजा जनक से पूछा कि इस धनुष को किसने तोड़ा वह तुरंत मेरे सामने आ जाए नहीं तो मैं इस फरसे से सारे राजाओं का सिर शरीर से अलग कर दूंगा।
वही प्रभु श्री राम माता सीता के विवाह की रेस में संपन्न हुई यह दृश्य देखकर पूरा पंडाल राजा रामचंद्र की जय के नारे से गूंज उठा । इस अवसर पर काशी के मानस वक्ता पंडित सच्चिदानंद त्रिपाठी ने भी प्रवचन दिया अंत में व्यासपीठ की आरती ज्ञानचंद मौर्य विष्णु गुप्ता सुजीत कुमार राजेंद्र जायसवाल ने की ।मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।
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