प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव में रैबीज संक्रमण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शेर मोहम्मद ने बताया कि रैबीज का संक्रमण अधिकतर रेबीज से ग्रसित कुत्ते के काटने से होता है और इसकी संभावना लगभग 95-96% होती है। उन्होंने कहा कि काटने या खरोंच लगने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जाकर रैबीज का पूरा टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी दिवाकर वर्मा ने कहा कि रैबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है और इसका सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण है। लैब तकनीशियन आर. के. यादव ने बताया कि काटने पर घाव को साबुन और बहते पानी से तुरंत साफ़ करें और आयोडीन या घरेलू एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करें। उन्होंने चेताया कि रैबीज सिर्फ कुत्ते से ही नहीं बल्कि बिल्ली, बंदर, नेवला, सियार और अन्य गर्म रक्त वाले जानवरों के काटने से भी फैल सकता है। इस कार्यक्रम में डॉ. गीता यादव, डॉ. जयंत, फार्मासिस्ट मनोज शर्मा और पंकज गुप्ता के साथ कई ग्रामीण और मरीज मौजूद रहे।
