नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अपने समय, समाज और परिस्थितियों से जुड़े गहरे संदेश देने का सशक्त जरिया भी होता है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रशिक्षुओं ने महान आचार्य भवभूति कृत संस्कृत नाटक ‘मालतीमाधवम्’ का प्रभावशाली मंचन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।25वें भारत रंग महोत्सव के अंतर्गत सोमवार की शाम नागरी नाटक मंडली के मुरारीलाल मेहता प्रेक्षागृह में इस नाटक का मंचन हुआ। मंच पर प्रशिक्षु रंगधर्मियों ने पात्रों को सहज भाव से जीवंत कर दिया।
सशक्त अभिनय के साथ वस्त्र विन्यास ने प्रस्तुति की सौंदर्यता को और बढ़ाया। विशेष रूप से रति और कामदेव के पात्रों को एक ही रंग-रूप में नख से शिख तक प्रस्तुत करने का प्रयोग दर्शकों को खूब भाया, जिसकी सराहना तालियों से होती रही।मालतीमाधवम्’ के केंद्र में प्रेम, त्याग और धर्म का संघर्ष उभरकर सामने आया। उज्जयिनी के मंत्री देवरात की पुत्री मालती और विदर्भ के मंत्री कमंदकी के शिष्य माधव के प्रेम की कथा सत्ता, षड्यंत्र और क्रूर परिस्थितियों से टकराती है।
यहां तक कि नायिका की बलि देने की साजिश भी रची जाती है। अनेक विपरीत हालातों से गुजरते हुए अंततः करुणा, मित्रता और धर्म की विजय होती है और प्रेम अपना मार्ग खोज लेता है।नाटक का संगीत संयोजन अजय कुमार ने किया, जबकि परिधान परिकल्पना स्वाति दूबे की रही। प्रकाश, मंच-सज्जा और सहायक निर्देशन की जिम्मेदारी गुंजन शुक्ला ने संभाली। समग्र रूप से यह मंचन दर्शकों के लिए न केवल एक कलात्मक अनुभव रहा, बल्कि युवा रंगकर्मियों के उज्ज्वल भविष्य की झलक भी प्रस्तुत करता दिखा।

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