काशी की धरती एक बार फिर छात्र राजनीति और सामाजिक न्याय की आवाज़ का केंद्र बन गई। शुक्रवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में एससी, एसटी, ओबीसी एकता मंच के आह्वान पर छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों यानी यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पैदल मार्च और सभा का आयोजन हुआ।काशी विद्यापीठ में प्रदर्शन की शुरुआत समाज चौराहे से हुई। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शोधार्थी और शिक्षक हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए मानविकी संकाय तक पहुंचे। इसके पश्चात गांधी जी की प्रतिमा के नीचे धरना स्थल पर एक सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से छात्र नेता रविंद्र सिंह पटेल, राहुल सोनकर, आशीष मौर्य और ज्योति नंद भास्कर उपस्थित रहे।सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में पिछड़े, दलित, आदिवासी वर्ग के छात्रों के साथ मानसिक और प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग छात्रों के उत्पीड़न के मामलों में 118 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने के उद्देश्य से यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 लाए गए थे, ताकि शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षित और समान वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए स्टे पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। छात्रों का कहना है कि ये नियम वंचित वर्ग के छात्रों के लिए सुरक्षा कवच की तरह थे। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि कानूनी बाधाओं को दूर कर इन रेगुलेशंस को शीघ्र बहाल किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।छात्रों के तेवर को देखते हुए विद्यापीठ प्रशासन और वाराणसी पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर रही। परिसर के सभी मुख्य द्वारों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। डीसीपी काशी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शन से एक दिन पूर्व छात्रों के साथ बैठक कर शांति बनाए रखने की अपील की थी। सुरक्षा के मद्देनज़र बिना परिचय पत्र के परिसर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा।

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