सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में गुजरात स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित डांडिया एवं गरबा नृत्य कार्यक्रम हर्षोल्लास, सांस्कृतिक गरिमा और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन में शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरा परिसर उत्सवमय हो उठा।इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति और धरोहर है। उन्होंने कहा कि डांडिया और गरबा जैसे लोकनृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना के जीवंत प्रतीक हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरूकता की भावना मजबूत होती है।
कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने डांडिया और गरबा की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये नृत्य परंपराएँ भक्ति, ऊर्जा और सामूहिकता का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करती हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक गुजराती वेशभूषा में मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। लय, ताल और समन्वय से सजी इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान भी प्रदान किया गया।अंत में आयोजकों ने सभी गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता से ही यह आयोजन भव्य और सफल हो सका। साथ ही विश्वविद्यालय परिवार ने भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प लेते हुए भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।इस अवसर पर प्रो. विधु द्विवेदी, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. विजय कुमार शर्मा, डॉ. रानी द्विवेदी सहित अन्य शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

