देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। भले ही सरकार अब तक इस तरह की खबरों से इनकार करती रही हो, लेकिन हालात कुछ और इशारा कर रहे हैं।संजय मल्होत्रा ,जो भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर हैं, ने साफ संकेत दिया है कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबा चलता है, तो भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ती लागत का बोझ खुद उठा रही हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनाए रखना संभव नहीं होगा।महंगाई और सप्लाई पर असरगवर्नर ने यह भी बताया कि अप्रैल महीने में महंगाई दर बढ़कर 3.48% तक पहुंच गई, हालांकि यह अनुमान से कम रही। इसकी बड़ी वजह यह रही कि सरकार ने अभी तक ईंधन की बढ़ी कीमतों का असर आम जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंचने दिया।
लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई-चेन पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर साफ दिख सकता है।अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है। ऐसे में सरकार के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

