निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को काशी में भगवान शिव के सामूहिक जलाभिषेक के लिए भव्य कलश यात्रा निकाली गई। उत्तरवाहिनी मां गंगा के पावन तट से प्रारंभ हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।आयोजकों ने बताया कि समुद्र मंथन से निकले विष को मानव कल्याण के लिए स्वयं ग्रहण करने वाले भगवान शिव नीलकंठ के रूप में पूजित हैं। मान्यता है कि विष की जलन को शांत करने के लिए शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है, इसलिए ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी पर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना गया है।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोकायत देवता नटराज के जलप्रिय स्वरूप बाबा विश्वनाथ का सामूहिक जलाभिषेक करना तथा सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। आयोजकों के अनुसार यह काशी की प्रमुख और विशाल कलश यात्राओं में से एक है, जिसकी पहचान देशभर में है।बताया गया कि आदि शंकराचार्य की प्रेरणा से वर्ष 1999 में इस कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ था। इसका उद्देश्य देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ना तथा राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करना है। निर्जला एकादशी पर प्रातः 7 बजे राजेन्द्र प्रसाद घाट से कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए बाँसफाटक पहुंची और वहां से ज्ञानवापी स्थित श्री काशी विश्वेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के साथ संपन्न हुई।


