संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इसे पूर्व नियोजित घटनाक्रम बताया है। आयोग के अनुसार, सर्वे का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को पहले से एकत्र किया गया था और भीड़ को संगठित तरीके से मौके पर पहुंचाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसकी तैयारी पहले से की गई थी, जिससे हालात तेजी से बिगड़े और हिंसा फैल गई।
रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों की भूमिका की जांच आवश्यक है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अफवाहों और भड़काऊ संदेशों ने भी भीड़ को उग्र बनाने में अहम भूमिका निभाई। आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की सिफारिश की है।
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