परीक्षा परिणाम आते ही सफल विद्यार्थियों में खुशी की लहर तो असफल विद्यार्थियों में मायूसी छा जाती है। परीक्षा का परिणाम चाहे जो भी हो छात्रों को धैर्य का परिचय देना चाहिए। ये कहना था वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक व शिक्षाविद डॉ मनोज कुमार तिवारी का उन्होंने कहा कि छात्र एवं अभिभावकों को यह समझ लेना चाहिए कि यह परीक्षा का परिणाम है न कि जीवन का, इसलिए जिनका परिणाम अपेक्षा से कम आया है उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्हें उन कमियों को ढूंढने का प्रयास करना चाहिए जिसके कारण उनका परीक्षा परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा।
बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के बाद जिन विद्यार्थियों के अंक उनकी अपेक्षा से काम आ जाता है या जो परीक्षा उत्तीर्ण करने में सफल नहीं होते उनमें से अनेक विद्यार्थी मायूस होकर आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाते हैं उन्हें समझ लेना चाहिए कि सफलता असफलता की राह से होकर गुजरती है यह केवल एक परीक्षा का रिजल्ट है न कि जीवन का, जीवन अमूल्य है छात्र अपने सकारात्मक सोच, परिश्रम व लगन से परीक्षा के परिणाम को आगे बदल सकते हैं।
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