कोडीन युक्त अवैध कफ सिरप के धंधे से जुड़े सबसे बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होते ही जिला औषधि विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। ड्रग विभाग ने अब 11 और फर्मों को नोटिस जारी किया है, जिनके नाम से प्रतिबंधित कफ सिरप की बिलिंग की जाती थी, जबकि मौके पर जांच में ये फर्में अस्तित्व में ही नहीं मिलीं—कहीं जनरल स्टोर तो कहीं सब्जी की दुकान संचालित होती पाई गई।जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। पूर्व में कांग्रेस नेता अजय राय ने ड्रग अधिकारी नरेश मोहन दीपक को इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया था। नरेश मोहन दीपक मार्च 2024 तक वाराणसी में तैनात रहे और उसी दौरान बड़ी संख्या में ड्रग लाइसेंस जारी किए गए। जांच में यह भी पुष्टि हुई है कि कई लाइसेंस बिना भौतिक निरीक्षण के जारी किए गए थे।
सभी संदिग्ध फर्मों से सिर्फ कोडीन युक्त कफ सिरप की ही बिलिंग होती थी और लगभग 100 करोड़ रुपए का अवैध सिरप बनारस में खपाया गया। इस घोटाले का सरगना शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला जायसवाल फरार बताए जा रहे हैं, जिन्हें अब तक पुलिस पकड़ नहीं सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT भी जांच में जुटी हुई है। वहीं, सिंडिकेट के एक प्रमुख मोहरे अमित सिंह टाटा को STF उत्तर प्रदेश ने हिरासत में ले लिया है।इस पूरे मामले पर औषधि विभाग वाराणसी के असिस्टेंट कमिश्नर प्रबुद्ध रस्तोगी (Byte) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

