वाराणसी में विधान परिषद की याचिका समिति की बैठक सर्किट हाउस सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कार्यकारी माननीय सभापति अशोक अग्रवाल ने की। इस दौरान समिति ने कुल 18 प्रकरणों की समीक्षा की और वाराणसी के सात प्रमुख विभागों—लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायती राज, ऊर्जा, ग्राम विकास, नगर निगम और आवास-विकास से जुड़े जनहित मामलों की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत चर्चा की।बैठक की शुरुआत नगर निगम से जुड़े विषयों की समीक्षा से हुई। नगर आयुक्त ने विभिन्न निर्माण कार्यों, इंटरलॉकिंग रोड, आउटडोर जिम, पार्कों के सौंदर्यीकरण और गुणवत्ता से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की। सभापति ने निर्देश दिया कि विकास कार्यों के शिलान्यास और लोकार्पण में विधान परिषद सदस्यों के नाम अवश्य शामिल किए जाएं।
समिति ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रकरणों पर बेहतर अंतरविभागीय समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। सभापति अशोक अग्रवाल ने कहा कि जिन मामलों में शासन स्तर पर कार्रवाई आवश्यक है, उन्हें तत्काल शासन को भेजा जाए और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि प्रकरण शीघ्र निपट सकें।ग्राम वाजिदपुर, हरहुआ में सीसी रोड व नाली निर्माण से जुड़े प्रकरण पर समुचित जवाब न मिलने पर समिति ने असंतोष व्यक्त किया। वहीं विधान परिषद सदस्य राय धर्मेंद्र सिंह ने जिला पंचायत के विकास और सड़कों की गुणवत्ता की जांच कराने की बात कही।विद्युत विभाग को निर्देश दिया गया कि विद्युतीकरण से वंचित मजरों के लिए जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव लेकर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और मुख्य विकास अधिकारी को सभी प्रकरणों की स्पष्ट रिपोर्ट और फोटोग्राफ्स उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
समिति ने ग्राम अखरी, रामपुर और लठिया में किसानों की भूमि मुक्त कराने से जुड़े मामलों पर जिलाधिकारी को आवास-विकास परिषद के साथ सर्वे कर भूमि उपलब्धता की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।सभापति ने कहा, “सभी याचिकाएं जनता से जुड़ी होती हैं, इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि इन पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।”बैठक के अंत में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया और आश्वस्त किया कि समिति के निर्देशों का शीघ्र पालन कराया जाएगा।बैठक में याचिका समिति सदस्य अरुण पाठक, मुकुल यादव, उमेश कुमार द्विवेदी, श्याम नारायण सिंह ‘विनीत सिंह’, आशुतोष सिन्हा, हंसराज विश्वकर्मा, राय धर्मेंद्र सिंह समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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