स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देशभर में एक संगठित ‘सेना’ तैयार करने की घोषणा की है, जिसे पुलिस व्यवस्था की तरह संरचित किया जाएगा। इस योजना के तहत हर जिले में 27 गुट बनाए जाएंगे, जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहेंगे।इस पहल को लेकर एक महामंडलेश्वर ने कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य गोमाता की रक्षा करना है। उन्होंने कहा, “हम गोमाता की सुरक्षा के लिए अपनी जान भी देने को तैयार हैं।”
बताया जा रहा है कि यह ‘सेना’ निगरानी और जागरूकता जैसे कार्यों में शामिल होगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत सक्रिय होगी। इसे एक अनुशासित ढांचे में संगठित करने की योजना है ताकि हर जिले में इसकी मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।हालांकि, इस घोषणा के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ऐसे में किसी समानांतर संरचना की भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है।प्रतिक्रिया:इस बयान पर अलग-अलग वर्गों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ इसे कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती मान रहे हैं।

