वाराणसी (काशी) से एक महत्वपूर्ण धार्मिक-सामाजिक घोषणा सामने आई है। शंकराचार्य ने एक सभा के दौरान 2.18 लाख सैनिकों की ‘चतुरंगिणी सेना’ तैयार करने का ऐलान किया। इस घोषणा ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि यह सेना समाज की रक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से बनाई जाएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह सेना पहले “रोकेगी, टोकेगी और जरूरत पड़ने पर ठोक देगी”, यानी किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विरोध का सख्ती से जवाब दिया जाएगा।बताया जा रहा है कि ‘चतुरंगिणी सेना’ का अर्थ पारंपरिक रूप से चार अंगों—पैदल सेना, घुड़सवार, रथ और हाथी—से होता है, लेकिन आधुनिक संदर्भ में इसे संगठित स्वयंसेवी बल के रूप में देखा जा रहा है।
सभा में मौजूद अनुयायियों ने इस घोषणा का समर्थन कियाहीं कुछ सामाजिक और राजनीतिक वर्गों में इस पर सवाल भी उठने लगे हैं कि इस तरह की सेना का गठन कानून और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप होगा या नहीं।फिलहाल, इस योजना के स्वरूप, प्रशिक्षण और संचालन को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। प्रशासन की ओर से भी इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।यह घोषणा आने वाले समय में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का बड़ा मुद्दा बन सकती है।

