इथियोपिया में 12 हजार साल बाद सक्रिय हुए हेले गुब्बी ज्वालामुखी का प्रभाव भारत तक देखने को मिला। विस्फोट के बाद उठी राख और सल्फर डाइऑक्साइड के बादल लगभग 15 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंचकर लाल सागर पार करते हुए यमन और ओमान के आसमान में फैल गए।रात लगभग 11 बजे यह गुबार 4,300 किमी दूरी तय करके भारत के कई राज्यों राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली एनसीआर और पंजाब तक पहुंच गया। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार राख की ऊंचाई बहुत ज्यादा होने के कारण जमीन पर रहने वाले लोगों के जीवन पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जानकारी दी कि यह राख का बादल लगातार आगे बढ़ रहा है और मंगलवार शाम 7:30 बजे तक भारत के आसमान से पूरी तरह साफ होकर चीन की ओर बढ़ जाएगा।ज्वालामुखी की गतिविधि का असर विमान उड़ानों पर भी दिखाई दिया। एयर इंडिया ने एहतियातन 11 उड़ानें रद्द कीं, ताकि राख से इंजन को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।विशेषज्ञों का कहना है कि राख के ऊपरी वातावरण में होने के कारण यह आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरा नहीं बनी, लेकिन विमान संचालन के लिए सावधानी बरतना जरूरी था।

