उत्तर प्रदेश में 14 दिसंबर से 22 दिसंबर तक सघन पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का लक्ष्य प्रदेश के 33 जिलों में 1.33 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाना है, ताकि राज्य को पोलियो-रहित बनाए रखने के प्रयास और मजबूत हों। स्वास्थ्य विभाग ने इसे अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानते हुए व्यापक तैयारी कर ली है।स्वास्थ्यकर्मी टीम बच्चों को दवा पिलाएगी।रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और स्कूलों के आसपास विशेष बूथ लगाए जाएंगे।पल्स पोलियो ड्रॉप्स 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को दी जाएंगी।शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी विशेष टीमें सक्रिय रहेंगी।अभियान में हजारों स्वास्थ्य कर्मियों, आशा बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लगाया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा छूट न जाए।
राज्य सरकार ने सभी जिलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पोलियो की खुराक 100% कवरेज के साथ पूरी कराई जाए।यूपी देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है और यहां की आबादी को देखते हुए पोलियो का खतरनाक असर कभी भी लौट सकता है। इसी वजह से हर वर्ष चलाए जाने वाले पल्स पोलियो अभियान में इस बार विशेष सतर्कता बरती जा रही है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पोलियो पर काबू पाने के बावजूद इसके वायरस को खत्म करने की लड़ाई अभी जारी है। दुनिया के कुछ देशों में पोलियो के केस सामने आने के बाद भारत ने तैयारियों को और मजबूत किया है।स्वास्थ्य विभाग ने माता-पिता से अपील की है:पोलियो की सिर्फ दो बूंद—आपके बच्चे के भविष्य के लिए जरूरी है। टीम घर आए, तो ज़रूर दवा पिलाएं। किसी भी बच्चे को छूटने न दें।”यह अभियान न सिर्फ सरकारी कार्यक्रम है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित रखने का सामूहिक मिशन है। 1.33 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस प्रयास में पूरे प्रदेश की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण होगी।पोलियो मुक्त भारत की दिशा में यूपी का यह कदम बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।
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