वाराणसी में साइबर अपराध नियंत्रण और त्वरित निस्तारण को लेकर पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्यालय में एक विस्तृत समीक्षा गोष्ठी की। इस गोष्ठी में साइबर थाना, साइबर सेल और जनपद के सभी थानों के साइबर हेल्प डेस्क प्रभारियों ने भाग लिया।समीक्षा के दौरान वर्ष 2025 में वाराणसी पुलिस द्वारा की गई ऐतिहासिक और प्रभावी कार्रवाइयों को रेखांकित किया गया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि बीते वर्ष वाराणसी से संचालित 06 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ कर 76 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। ये अपराधी देश-विदेश के लोगों को ठगने के लिए यहीं से कॉल सेंटर चला रहे थे। यह वाराणसी पुलिस की पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
इसके अलावा म्यूल अकाउंट खोलने वाले 20 अभियुक्तों और फर्जी नाम से सिम कार्ड बेचने वाली 15 फर्मों को चिन्हित कर जेल भेजा गया। साइबर सेल ने वर्ष 2025 में साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों के कुल 9.5 करोड़ रुपये वापस कराए। वहीं 4888 मोबाइल नंबर ब्लॉक किए गए, 947 मोबाइल फोन के IMEI नंबर डिएक्टिवेट किए गए और 115 फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट निष्क्रिय कराए गए। पहली बार साइबर अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।पुलिस आयुक्त ने बताया कि साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए 500 से अधिक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। समीक्षा बैठक में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के 83 प्रतिशत निस्तारण दर पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक साइबर फ्रॉड प्रकरण में धोखाधड़ी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर और संबंधित डिवाइस का IMEI प्राथमिकता के आधार पर अनिवार्य रूप से ब्लॉक कराया जाए, ताकि भविष्य में दोबारा अपराध न हो सके। साथ ही उपलब्ध जनशक्ति का प्रभावी उपयोग करते हुए 24×7 ड्यूटी व्यवस्था लागू करने, शिकायतों के LIEN टाइम को न्यूनतम करने और प्रत्येक मामले में पूरे गैंग/नेक्सस की पहचान कर सभी संलिप्त अभियुक्तों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

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