काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर पारंपरिक चिता-भस्म की होली पूरे उत्साह और आस्था के साथ खेली गई। हजारों की तादाद में श्रद्धालु इस अनूठी होली में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम बाबा मसान नाथ की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती से हुई, जिसके बाद चिता-भस्म की होली प्रारंभ की गई।घाट परिसर में ‘होली खेले मसाने में’ गीत और डमरू की थाप पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। आयोजकों द्वारा चिता की भस्म की वर्षा की गई, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से स्वीकार करते हुए होली के गीतों पर उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस आयोजन में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति भी देखने को मिली।
प्रशासन की सख्त निगरानी
इस बार जिला प्रशासन की ओर से विशेष सतर्कता बरती गई। घाट की ओर जाने वाले कई रास्तों को बंद कर दिया गया था और केवल सीमित संख्या में लोगों को मंदिर परिसर में होली खेलने की अनुमति दी गई। पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात रहा तथा सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी की गई।डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी, एसीपी दशाश्वमेध ने बताया कि आयोजन को सकुशल संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया।
आस्था और परंपरा का संगम
काशी में मान्यता है कि महाश्मशान में भगवान शंकर स्वयं अपने भक्तों के साथ चिता-भस्म की होली खेलते हैं। रंगभरी एकादशी के बाद काशी में पारंपरिक होली उत्सव की शुरुआत हो जाती है और प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों में होली मनाई जाती है। रंगभरी एकादशी के अगले दिन आयोजित होने वाली चिता-भस्म की होली का इंतजार भक्त पूरे वर्ष करते हैं।कहा जाता है कि ब्रज की होली के बाद काशी की होली विश्व प्रसिद्ध मानी जाती है। हालांकि इस बार आयोजन को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए थे।
आयोजक का पक्ष
मणिकर्णिका घाट पर आयोजित होने वाली इस परंपरागत होली को लेकर आयोजक गुलशन कपूर ने कहा कि यह आयोजन सदियों से होता आ रहा है और इसका उल्लेख वेद-पुराणों में भी मिलता है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले लोग काशी की परंपराओं से परिचित नहीं हैं और बेवजह इस आयोजन को तूल देने की कोशिश की जा रही है।श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा के साथ मसाने की होली खेलने का सौभाग्य जीवन में विरले ही मिलता है और यह काशी की अद्वितीय परंपरा है।काशी की इस अद्भुत और आध्यात्मिक परंपरा ने एक बार फिर आस्था, संस्कृति और उत्साह का अनोखा संगम प्रस्तुत किया।

