डॉ. ओम शंकर, कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट, आईएमएस-एसएसएच बीएचयू ने कहा कि उनका जीवन लक्ष्य पैसा कमाना नहीं बल्कि गरीब मरीजों की सेवा करना है। उन्होंने बताया कि अपने छोटे भाई की इलाज के अभाव में हुई मौत ने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में सफल करियर छोड़कर उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय को चुना। BHU आने के समय कार्डियोलॉजी विभाग में न एंजियोग्राफी थी और न एंजियोप्लास्टी, ओपीडी भी सीमित थी। उनके प्रयासों से आज विभाग में प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों का इलाज और नियमित ऑपरेशन हो रहे हैं।डॉ. ओम शंकर ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें ओपीडी चलाने से रोका गया, लेकिन बाद में अनुमति मिलने पर उन्होंने काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि BHU में पहली एंजियोग्राफी के दौरान गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई, जिसे उन्होंने कई घंटे की मेहनत से संभालकर मरीज की जान बचाई। इसके बाद 2011 में उन्होंने हार्ट अटैक के मरीज पर पहली एंजियोप्लास्टी कर इतिहास बनाया।
उन्होंने वर्ष 2014 में AIIMS स्तर की सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन करने, निलंबन झेलने और अनशन करने की बात भी कही। उनका दावा है कि इस आंदोलन के बाद देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ और BHU को भी बड़ा अनुदान मिला।डॉ. ओम शंकर ने संस्थान में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कहा कि योजनाओं में धन का दुरुपयोग, नियमविरुद्ध नियुक्तियां, कार्डियोलॉजी विभाग को बेड न देना और मरीजों की सुविधाओं में कटौती जैसे मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को उठाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।उन्होंने मांग की कि उनके खिलाफ कार्रवाई वापस ली जाए, आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और गरीब मरीजों के लिए मुफ्त दवा व भोजन जैसी सुविधाएं बहाल की जाएं। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष व्यक्तिगत नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए है।

