चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन माँ विशालाक्षी गौरी की आराधना पूरे श्रद्धा भाव के साथ की गई। परंपरानुसार मीरघाट स्थित शक्तिपीठ विशालाक्षी मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने मां के दरबार में पहुंचकर परिवार, समाज और देश की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।मां विशालाक्षी गौरी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी माना जाता है। ‘विशालाक्षी’ नाम का अर्थ ही है—विस्तृत, करुणामयी और सब पर कृपा दृष्टि रखने वाली मां। उनका मुखमंडल तेजस्वी, नेत्र बड़े और करुणा से परिपूर्ण माने जाते हैं, जो भक्तों पर निरंतर कृपा बरसाते हैं। मां गौरी के इस रूप में वे सौम्यता, शांति और मातृत्व का प्रतीक हैं। उन्हें श्रृंगार प्रिय माना जाता है, इसलिए भक्त चुनरी, सोलह श्रृंगार, पुष्प और मिष्ठान अर्पित कर मां को प्रसन्न करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां विशालाक्षी गौरी की पूजा से सौभाग्य, समृद्धि, वैवाहिक सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से महिलाएं परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर मां के चरणों में शीश नवाती हैं।नवरात्र के इस पावन अवसर पर मंगला आरती से पहले ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर पट खुलने का इंतजार करते नजर आए। पट खुलते ही जयकारों के बीच भक्तों ने विधि-विधान से पूजन कर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।मान्यता है कि नवरात्र में मां गौरी के इस स्वरूप के दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। यही कारण है कि काशी के विशालाक्षी धाम में नवरात्र के दौरान आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

