नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना का विशेष महत्व, वागेश्वरी देवी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। शक्ति और भक्ति के इस पावन पर्व में आज श्रद्धालु माँ स्कंदमाता की आराधना कर ज्ञान, सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और अपने भक्तों को साहस, आत्मविश्वास तथा मानसिक शांति प्रदान करती हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर मां सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।काशी में स्कंदमाता का प्रमुख मंदिर जैतपुरा क्षेत्र स्थित वागेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध है। जहां नवरात्र के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दूर से आए भक्त नारियल, फूल और चुनरी चढ़ाकर मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, स्कंदमाता सिंह पर सवार होकर अपने गोद में भगवान कार्तिकेय को धारण किए रहती हैं। उनका यह स्वरूप यह संदेश देता है कि सांसारिक जीवन जीते हुए भी भक्ति के मार्ग पर चलकर ज्ञान और विवेक के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाई जा सकती है। मां स्कंदमाता को विद्यावाहिनी, माहेश्वरी और गौरी के नाम से भी जाना जाता है।मंदिर के पुजारी ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता के दर्शन-पूजन का विशेष फल मिलता है। इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा करने पर सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां स्कंदमाता की आराधना से न केवल आध्यात्मिक शक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और सफलता का मार्ग भी प्रशस्त होता है। यही कारण है कि नवरात्र के इस दिन काशी के मंदिरों में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है।



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