राष्ट्रीय पिछड़ा मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पटेल ने जनगणना में ओबीसी जातियों के लिए अलग कॉलम न दिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे पिछड़े वर्गों के साथ “धोखेबाजी” करार दिया।डॉ. पटेल ने कहा कि देश की आजादी के 78 वर्ष और संविधान लागू होने के 75 वर्ष बाद भी पिछड़े वर्गों को न्याय नहीं मिल सका है। सामाजिक न्याय के लिए सटीक आंकड़ों की आवश्यकता होती है, लेकिन अब तक ओबीसी वर्ग की वास्तविक जनसंख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पूरा डेटा सामने नहीं लाया गया है।उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार की कैबिनेट ने 2027 की जनगणना में व्यापक जाति आधारित गणना को मंजूरी दी थी, लेकिन 22 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना में हाउस-लिस्टिंग चरण की प्रश्नावली में ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल नहीं किया गया। वर्तमान प्रारूप में केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या “अन्य” का विकल्प दिया गया है, जिससे ओबीसी को फिर उसी “अन्य” श्रेणी में रखा जा रहा है।
डॉ. पटेल ने कहा कि यदि शुरुआती चरण में ही ओबीसी से संबंधित डेटा एकत्र नहीं किया जाएगा, तो उनकी वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने इसे प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि पिछड़े वर्गों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश बताया।उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा मुक्ति मोर्चा देशभर में चरणबद्ध आंदोलन करेगा और भारत बंद की तैयारी भी की जा रही है। संगठन ने मांग की है कि आगामी जनगणना में ओबीसी सहित सभी जातियों के लिए अलग-अलग कॉलम जोड़े जाएं, ताकि उनकी वास्तविक जनसंख्या के आधार पर शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

