भक्तों के अति स्नान से अस्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ, परंपरा अनुसार लगाया जा रहा विशेष काढ़े का भोग

धर्म नगरी काशी अपनी अनूठी परंपराओं के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। काशी की एक अनोखी परंपरा है जिसमें भगवान जगन्नाथ हो भक्तों के द्वारा अति स्नान करा दिया जाता है भक्त अपने प्रभु के प्रेम में उन्हें स्नान कराते हैं स्नान की अधिकता होने से प्रभु लगभग एक पखवाड़े तक बीमार पड़ जाते हैं। वही इन दिनों भीषण गर्मी में लोग परेशान हैं। काशी में विराजमान जगत के पालनहार भगवान जगन्नाथ बीमार हो गए हैं। वह भक्तों को अपना दर्शन नहीं दे रहें। भगवान जगन्नाथ को ठीक करने के लिए उन्हे प्रतिदिन विशेष प्रकार से तैयार किया हुआ काढ़े का भोग लगाया जा रहा हैं। आपको बता दें कि भगवान जगन्नाथ को ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के दिन भक्त जलाभिषेक करते है। इस दिन भक्त अपने भगवान को इतना स्नान करा देते हैं कि भगवान 15 दिनों के लिए बीमार पड़ जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 15 दिन इस काढ़े के सेवन के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा स्वस्थ्य हो जाते है। भगवान जगन्नाथ को चढ़ने वाला ये काढा इतना चमत्कारिक है कि इसके सेवन से भक्तों के रोग भी दूर हो जातें है। भगवान जगन्नाथ को भोग लगाने के बाद इस खास काढ़े को प्रसाद स्वरूप भक्तो में बांटा जाता है।

पुजारियों ने कहा कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से अर्ध रात्रि तक भगवान को स्नान कराया जाता है। भगवान 15 दिन तक बीमार हो जाते हैं। इन दिनों भगवान आराम करते हैं। भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं। और उन्हें काढ़ा दिया जाता है, जिससे वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाये। पूजारी का कहना हैं कि अपने भगवान का दर्शन करने आज भी लोग दूर दराज से पहुंचते हैं। बाहर से ही मत्था टेक कर चले जाते हैं।15 दिनों में प्रभु को विशेष कार्य का भोग लगाया जाता है जिसके बाद में पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाते हैं और इस उपलक्ष में भक्तों को वह दर्शन देते हैं और इसी दिन से रथयात्रा के मेले की शुरुआत हो जाती है। काशी के लक्खा मेले में शुमार रथयात्रा के मेले में भगवान जगन्नाथ भाई बलभद्र और सुभद्रा के साथ भक्तों के बीच में पहुंचकर उन्हें दर्शन देते हैं।

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