चार दिवसीय महायज्ञ के तीसरे और चौथे दिन परिसर आध्यात्मिक माहौल से सराबोर रहा। यज्ञ की सुगंध, मंत्रों की गूंज और भक्तिभाव से पूरा वातावरण पवित्र हो उठा। सायंकाल 5000 वेदीय दीपों का सामूहिक प्रज्ज्वलन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र दिव्य आभा से आलोकित हो गया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी इस अनुष्ठान में सहभागिता की।
कार्यक्रम में श्री दुबे ने ‘राज समर्थ तुम सशक्त संस्कार हुआ कैसे बनें’ विषय पर उद्बोधन देते हुए सप्त आंदोलन, नशा निवारण और युवा जागरण पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने समाज निर्माण में सभी के सक्रिय योगदान का आह्वान किया।इसी क्रम में शांतिकुंज हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पांड्या का संबोधन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने कहा कि गायत्री मिशन का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव चेतना के उत्थान, नैतिक जागरण और जीवन में दिव्यता का विस्तार करना है।
उन्होंने युवाओं को विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।इस अवसर पर गायत्री परिवार के देशबंधु तिवारी, संजय चतुर्वेदी, ए.पी. शर्मा, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, दिनेश दीक्षित, डॉ. ओ.पी. सिंह, डॉ. नीरज बाजपेई, अवधेश कुमार शुक्ल, कुलदीप अवस्थी, वीना शुक्ला, लक्ष्मी शुक्ला, शिवमंगल शुक्ल, कृष्ण कुमार शुक्ल और मुन्ना रावत सहित हजारों सदस्य उपस्थित रहे।चार दिवसीय महायज्ञ का समापन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। परिसर में लगे पुस्तक मेले में श्रद्धालुओं ने हवन के उपरांत आध्यात्मिक साहित्य की खरीदारी की।आयोजन ने नगरवासियों के हृदय में नई रोशनी, सकारात्मकता और प्रेरणा की ज्योति प्रज्ज्वलित की।


