सांसद अशोक रावत द्वारा दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर अर्कवंशी समाज में तीव्र नाराज़गी देखने को मिल रही है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे न केवल अपमानजनक बताया, बल्कि इसे सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुँचाने वाला बयान करार दिया है। इसी विरोध के चलते समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा और सांसद पर संवैधानिक कार्रवाई की मांग की।ज्ञापन में कहा गया है कि सांसद का यह बयान न केवल एक पूरे समाज का अपमान करता है, बल्कि जनप्रतिनिधि के पद की गरिमा के भी विपरीत है। समाज के नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक अशोक रावत अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।अर्कवंशी समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि सांसद के बयान ने युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों दोनों के बीच आक्रोश पैदा किया है।
उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर किसी को सम्मानपूर्वक व्यवहार की उम्मीद होती है, और यदि कोई जनप्रतिनिधि ही अपमानजनक भाषा का प्रयोग करे तो यह अस्वीकार्य है।समाज ने यह भी चेतावनी दी कि यदि मांगों को जल्द स्वीकार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी मांग स्पष्ट है—1. सांसद अशोक रावत की ओर से सार्वजनिक माफी2.लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उचित संवैधानिक कार्रवाई3.ऐसे बयानों पर नियंत्रण हेतु स्पष्ट दिशानिर्देशअर्कवंशी समाज के विरोध के स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं, और अब पूरी नज़र इस बात पर है कि संसद तथा संबंधित प्रशासन इस मामले को किस तरह लेता है।
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