नगर निगम में चल रहे विवाद के बीच शहर की मेयर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने निगम के कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और जनसमस्याओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन अब उन्होंने अपने ही बयान से यू-टर्न लेते हुए कहा है कि “नगर निगम के पार्षद और अधिकारी सब मेरे परिवार जैसे हैं। हम मिलकर शहर का विकास कर रहे हैं।”राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष इसे दबाव की राजनीति का नतीजा बता रहा है, जबकि मेयर समर्थकों का कहना है कि उनकी मंशा शुरू से ही निगम व्यवस्था को सुधारने की रही है।48 घंटे पहले एक बैठक के दौरान मेयर ने निगम अधिकारियों पर कार्यों में देरी, निर्माण कार्यों में धांधली और बजट के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि कुछ अधिकारी जनहित के कामों को जानबूझकर रोक रहे हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।उनके इस बयान के बाद निगम प्रशासन में खलबली मच गई थी और अधिकारी यूनियन ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई थी।
आज मीडिया से बात करते हुए मेयर ने नरम लहजे में कहा—हम सभी एक टीम हैं। पार्षद हो या अधिकारी, सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं। किसी को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश्य नहीं था। मैंने सिर्फ कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत पर जोर दिया था।”सूत्रों का मानना है कि उच्च स्तर पर बातचीत के बाद स्थिति सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। मेयर और अधिकारियों के बीच जल्द ही एक संयुक्त बैठक भी प्रस्तावित है, ताकि मतभेद दूर किए जा सकें।विपक्षी दलों ने मेयर के बयान को राजनीतिक मजबूरी करार दिया है। विपक्षी पार्षदों का कहना है किमेयर ने सच बोला था, लेकिन दो दिन में उनका सुर बदल गया। इससे साफ है कि अंदरूनी दबाव काम कर रहा है।”जनता की नजर शहर के विकास कार्यों पर टिकी है। नागरिकों का कहना है कि बयानबाज़ी और टकराव से ज़्यादा ज़रूरी है किअधूरे कार्य पूरे हों सफाई व्यवस्था सुधरे सड़क, पानी और रोशनी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए

