देश की आंतरिक सुरक्षा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय शौर्य के संदेश को बल देने के उद्देश्य से नई दिल्ली स्थित ‘भारत मंडपम्’ में 13 और 14 दिसंबर 2025 को भव्य ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ आयोजित होने जा रहा है। ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ की प्रस्तुति एवं सनातन संस्था के आयोजन में होने वाले इस विशाल समारोह की जानकारी स्वागत समिति के सदस्य सदुरु निलेश सिंगबाळजी ने पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी।प्रेस वार्ता में सनातन संस्था के प्रतिनिधि संजय सिंह, ‘प्राच्यम’ के संस्थापक प्रवीण चतुर्वेदी एवं वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा उपस्थित रहे। समिति के अनुसार, यह महोत्सव सुरक्षा, संस्कृति और शौर्य को केंद्र में रखकर राष्ट्रहित की दिशा में व्यापक जनजागरण का कार्य करेगा।उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के कालखंड से संबंधित शस्त्रों का विशेष प्रदर्शन किया जाएगा। ‘भवानी तलवार’ और शिवकालीन युद्धकला का प्रस्तुतीकरण महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसके साथ ही देश की सुरक्षा, आतंकवाद के बढ़ते जाल और भारत की आंतरिक चुनौतियों पर विशेषज्ञों की विशेष चर्चा भी आयोजित की जाएगी।
संजय सिंह ने कहा कि गोवा में हुए प्रथम ‘शंखनाद महोत्सव’ में 23 देशों के 30,000 से अधिक भक्तों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति के प्रति वैश्विक आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है। गोवा के मुख्यमंत्री तथा विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों की उपस्थिति से वह आयोजन अत्यंत सफल रहा था। दिल्ली में होने वाला यह महोत्सव इससे भी अधिक व्यापक व ऐतिहासिक रूप लेने जा रहा है।कार्यक्रम के माध्यम से सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बालाजी आठवले द्वारा प्रतिपादित ‘सनातन राष्ट्र’ के आदर्शों को समाज तक पहुँचाने की तैयारी है। आयोजकों के अनुसार, महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धर्मनिष्ठ नागरिकों की आत्मशक्ति जागृत कर राष्ट्ररक्षा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक नवचेतना का एक नए युग का आरंभ सिद्ध होगा।देश में हाल ही में दिल्ली विस्फोट तथा आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के संदर्भ में भी यह महोत्सव सुरक्षा के विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक संवाद स्थापित करेगा। आयोजन समिति का कहना है कि जब देशविरोधी ताकतें नक्सलवाद, लव जिहाद, लैंड जिहाद, हलाल जिहाद एवं अन्य माध्यमों से भारत की स्थिरता को चुनौती दे रही हैं, तब समाज में क्षात्रवृत्ति, जिम्मेदारी और धर्मनिष्ठ चेतना को पुनर्जीवित करना समय की मांग है।दिल्ली में होने वाला ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ इसी नवचेतना का स्वर बनकर देशभर के नागरिकों को एकजुट करने का प्रयास करेगा।

