धर्मनगरी हरिद्वार की प्रसिद्ध हरकी पैड़ी पर गैर-हिंदुओं की चेकिंग शुरू किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। घाट किनारे दुकान और ठेली लगाने वालों के आधार कार्ड देखे जा रहे हैं और यह जांच की जा रही है कि कहीं कोई गैर-हिंदू क्षेत्र में व्यापार तो नहीं कर रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार यह चेकिंग ड्राइव श्री गंगा सभा की ओर से शुरू की गई है, जो कुंभ 2027 से पहले घाटों और कुंभ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग के बाद तेज हुई है।घाटों पर मौजूद तीर्थ पुरोहितों और साधु-संतों का कहना है कि इस तरह की सख्ती जरूरी है।
उनका आरोप है कि कुछ लोग कमाई की आड़ में श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाले काम कर रहे थे, जिससे विवाद और झगड़े की स्थिति बनती रही। संतों का तर्क है कि कुंभ एक अत्यंत पवित्र आयोजन है और हरिद्वार देवभूमि का द्वार माना जाता है, ऐसे में कुंभ और प्रमुख घाट क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए।दूसरी ओर इस मांग को लेकर मुस्लिम संगठनों और समाज के लोगों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
उनका कहना है कि घाटों पर प्रवेश रोकने और पहचान के आधार पर जांच करने की कोशिशें संकीर्ण सोच को दर्शाती हैं। उनका आरोप है कि इससे सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचेगा।हालांकि कुंभ 2027 में अभी समय है, लेकिन हरकी पैड़ी से शुरू हुई यह बहस अब पूरे हरिद्वार में चर्चा का विषय बन गई है। प्रशासन की भूमिका और इस चेकिंग को लेकर कोई आधिकारिक आदेश है या नहीं, इस पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल यह मुद्दा धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ता नजर आ रहा है।

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