हरिद्वार में 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ से पहले ही धार्मिक स्थलों में प्रवेश को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को हरकी पैड़ी क्षेत्र में उस समय हलचल मच गई, जब घाट किनारे अलग-अलग स्थानों पर करीब 12 पोस्टर लगाए गए, जिन पर लिखा था— “अहिंदू का प्रवेश निषेध क्षेत्र, आज्ञा से म्यूनिसिपल एक्ट हरिद्वार।”ये पोस्टर घाटों की व्यवस्था देखने वाली संस्था गंगा सभा की ओर से लगाए गए हैं।
पोस्टर लगने के बाद गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है और इस मुद्दे पर सियासी व सामाजिक बहस तेज हो गई है।गंगा सभा ने इस मामले में खुलकर अपना पक्ष रखा है। संस्था का कहना है कि हरकी पैड़ी और ब्रह्मकुंड क्षेत्र सनातन आस्था के प्रमुख केंद्र हैं, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और व्यवस्थाओं को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
संस्था के पदाधिकारियों का तर्क है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए कुछ नियमों का पालन आवश्यक है। वहीं, दूसरी ओर इस कदम को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या किसी सार्वजनिक धार्मिक स्थल पर इस तरह की रोक कानूनी रूप से उचित है।पोस्टर लगाए जाने की सूचना के बाद प्रशासन की नजर भी पूरे मामले पर बनी हुई है। फिलहाल इस मुद्दे पर किसी आधिकारिक कार्रवाई या आदेश की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अर्धकुंभ से पहले इस तरह के घटनाक्रम ने हरिद्वार की सियासत और धार्मिक माहौल को गरमा दिया है।

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