काशी की सांस्कृतिक परंपरा को समर्पित “संत रविदास महोत्सव – मन चंगा तो कटौती में गंगा” का प्रथम दिन आज रविदास पार्क, वाराणसी में विधिवत शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस महोत्सव का आयोजन मधु मूर्छना के संस्थापक डॉ. सौमा घोष एवं संत रविदास सोसाइटी द्वारा किया जा रहा है।महोत्सव के पहले दिन सुबह 8 बजे से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ हो गई। कार्यक्रम का शुभारंभ काशी की विश्वविख्यात शहनाई परंपरा के साथ हुआ, जिसे दुर्गाप्रसाद प्रसत्रा एवं उनके समूह ने प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की संगीत परंपरा को समर्पित रही।
प्रथम दिवस के कार्यक्रमों में शास्त्रीय और भक्ति संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। पंडित देवाशीष डे के सुमधुर गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं अंशुमान महाराज द्वारा प्रस्तुत सरोद एवं सितार वादन ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। भक्ति संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पं. गणेश प्रसाद मिश्रा एवं उनके शिष्यों ने प्रातःकालीन रागों एवं भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन और उनके सामाजिक संदेशों को मंच पर सजीव करने हेतु उमेश भाटिया एवं उनके समूह द्वारा संत रविदास की जीवनी पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने सराहा।
इसके अलावा शिल्पायन के छात्रों द्वारा सामूहिक भजन गायन, लोक कलाकारों द्वारा लोकगीत एवं लोकनृत्य तथा ताना-बाना समूह की विशिष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुति ने प्रथम दिन के कार्यक्रम को यादगार बना दिया।महोत्सव के प्रथम दिन बड़ी संख्या में कला प्रेमी, श्रद्धालु एवं काशीवासी उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन अंकिता खत्री नादान द्वारा किया गया।आयोजक डॉ. शुभंकर घोष ने बताया कि संत रविदास महोत्सव का उद्देश्य संत रविदास जी के समता, करुणा और आत्मिक शुद्धि के संदेश को समाज तक पहुंचाना है। महोत्सव का दूसरा दिन कल भी विविध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगा, जिसमें भजन सम्राट अनुप जलोटा की विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।

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