नई दिल्ली दान और धर्म के नाम पर कमाई का कितना हिस्सा खर्च करना चाहिए—यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है। इस विषय पर प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज का मार्गदर्शन कई बार चर्चा में रहा है। उनके अनुसार, दान केवल राशि का नहीं, बल्कि भावना और संतुलन का विषय है।क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज?प्रेमानंद महाराज के विचारों के मुताबिक, व्यक्ति को अपनी कमाई का लगभग 10 प्रतिशत दान या धर्मकार्य में लगाने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि, वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह कोई कठोर नियम नहीं है।
दान उतना ही हो, जिससे घर-परिवार की जिम्मेदारियां प्रभावित न हों।भावना सबसे अहममहाराज के अनुसार, दान का मूल्य उसकी राशि से नहीं, बल्कि भावना और निष्ठा से तय होता है। यदि कोई व्यक्ति कम कमाता है और थोड़ी-सी मदद भी सच्चे मन से करता है, तो वह भी उतना ही पुण्यदायी माना जाता है जितना बड़ी राशि का दान।
पहले कर्तव्य, फिर दानवे यह भी कहते हैं कि दान से पहले व्यक्ति को अपने परिवार, स्वास्थ्य और आवश्यकताओं का ध्यान रखना चाहिए। कर्ज लेकर या मजबूरी में किया गया दान धर्म नहीं कहलाता।कैसे करें सही दान?जरूरतमंदों की सहायता शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्य संत, साधु या धार्मिक संस्थानों को सहयोग गौसेवा और अन्नदान जैसे सेवा कार्य

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