मणिकर्णिका घाट मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को जारी नोटिस पर उन्होंने वाराणसी पुलिस को अपना जवाब सौंप दिया है। जवाब में संजय सिंह ने कहा है कि उन्होंने अपने एक्स (Twitter) हैंडल से जो वीडियो और तथ्य साझा किए हैं, वे वास्तविक घटनाओं, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और प्रत्यक्ष साक्ष्यों पर आधारित हैं।गौरतलब है कि संजय सिंह ने मणिकर्णिका घाट पर स्थित मढ़ी (चबूतरा) को तोड़े जाने को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे, जिसके बाद वाराणसी पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।
संजय सिंह ने अपने जवाब में कहा कि मणिकर्णिका घाट पर स्थित मढ़ी पर उकेरी गई कलाकृति, प्राण-प्रतिष्ठित शिवलिंग और लोकमाता अहिल्याबाई की प्रतिमा को तोड़ा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा साझा किए गए सभी साक्ष्य प्रत्यक्ष और वास्तविक हैं। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका मोक्ष की पवित्र भूमि है और वहां स्थापित शिवलिंग तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी प्रतिमाओं को तोड़ना किसी भी स्थिति में विकास नहीं कहा जा सकता।संजय सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सनातन आस्था पर हो रहे कुठारघात के खिलाफ आवाज उठाई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ की, उनके खिलाफ अब तक कोई एफआईआर या कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि सच्चाई उजागर करने वालों पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।इस पूरे मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है। पार्टी ने मांग की है कि मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़फोड़ की निष्पक्ष और न्यायिक जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, और सनातन आस्था से जुड़ी क्षतिग्रस्त संरचनाओं का पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही पार्टी ने संजय सिंह पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग भी की है।

.jpeg)
