लखनऊ भैंस का मांस बताकर गोमांस की बिक्री करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने आरोपी की इस “चालाकी” को गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्य समाज में कानून व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं दोनों को प्रभावित करते हैं।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि आरोपी द्वारा प्रतिबंधित गोमांस को भैंस का मांस बताकर बाजार में बेचा जा रहा था।
पुलिस जांच और लैब रिपोर्ट में मांस के गोमांस होने की पुष्टि होने के बाद आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।अग्रिम जमानत की मांग करते हुए आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है और बरामद मांस भैंस का ही था। हालांकि, सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने जानबूझकर कानून को चकमा देने की कोशिश की और साक्ष्य उसके खिलाफ स्पष्ट हैं।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका गंभीर प्रतीत होती है और ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।अदालत के आदेश के बाद आरोपी को फिलहाल किसी तरह की राहत नहीं मिली है। पुलिस अब आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

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