सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इस स्थल पर पूजा और नमाज—दोनों जारी रहेंगी, जिससे यथास्थिति (स्टेटस क्वो) बनी रहे।
मुख्य खबर
शीर्ष अदालत ने कहा कि भोजशाला परिसर में सभी समुदायों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान किया जाएगा और किसी एक पक्ष की धार्मिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत का यह निर्णय लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या कहा कोर्ट ने
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक मामले की अंतिम सुनवाई और फैसला नहीं हो जाता, तब तक पूजा और नमाज दोनों पूर्ववत रूप से होती रहेंगी। साथ ही प्रशासन को शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि
भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। एक पक्ष इसे सरस्वती मंदिर से जोड़ता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे ऐतिहासिक मस्जिद के रूप में मान्यता देता है। इस विवाद को लेकर विभिन्न याचिकाएं अदालत में लंबित हैं।
प्रशासन के निर्देश
परिसर में किसी भी प्रकार की नई गतिविधि की अनुमति नहीं
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखने के आदेश
धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाले बयानों और गतिविधियों पर सख्त नजर
प्रतिक्रियाएं
फैसले के बाद दोनों पक्षों ने संयम बरतने की अपील की है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने अदालत के आदेश का सम्मान करने की बात कही है।
आगे क्या
मामले की अगली सुनवाई में ऐतिहासिक साक्ष्यों और कानूनी दलीलों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। तब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों जारी रहेंगी।

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