वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड, वैश्विक अर्थव्यवस्था, पर्यावरण नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर बेबाक बयान दिए। ट्रंप ने कहा कि “ग्रीनलैंड कोई साधारण जमीन नहीं है और उसे अमेरिका के अलावा कोई नहीं बचा सकता।” उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ग्रीनलैंड को डेनमार्क को लौटाने के फैसले को अमेरिका की “सबसे बड़ी बेबकूफी” करार दिया।अपने संबोधन की शुरुआत ट्रंप ने “बहुत सारे दोस्तों” और “कुछ दुश्मनों” के अभिवादन के साथ की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता उन्हें चुनकर बेहद खुश है। ट्रंप ने दावा किया, “दो साल पहले हम एक मृत देश थे, लेकिन अब हम फिर से जीवित हो चुके हैं।”
आर्थिक मुद्दों पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों पर कर बढ़ा रहा है ताकि उससे हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। उन्होंने दावा किया कि “जब अमेरिका आर्थिक रूप से फलता-फूलता है, तो पूरी दुनिया आर्थिक रूप से फलती-फूलती है।” ट्रंप ने यह भी कहा कि आने वाले छह महीनों में अमेरिका उतना पैसा कमाएगा, जितना उसने पिछले छह वर्षों में कमाया था।वेनेजुएला के मुद्दे पर ट्रंप ने कहा कि यह देश कभी एक अद्भुत जगह हुआ करता था, लेकिन गलत नीतियों के कारण बर्बाद हो गया। उन्होंने दावा किया कि “हमला खत्म होने के बाद वेनेजुएला ने समझौते की बात की।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘पर्यावरण लॉबी’ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चीन यूरोप के “मूर्ख लोगों” को पवनचक्कियां बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि चीन में पवनचक्कियां दिखाई नहीं देतीं। ट्रंप ने कहा, “पवनचक्कियां पक्षियों को मारती हैं और लोग इन्हें खरीदते हैं। ऊर्जा से पैसा कमाना चाहिए, नुकसान नहीं।”कनाडा का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि उसे अमेरिका से कई मुफ्त सुविधाएं मिलती हैं और उसे इसके लिए आभारी होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि “आप लोग 30 सालों से हमें धोखा दे रहे हैं।”अंत में ट्रंप ने कहा कि वह हर देश के साथ काम करना चाहते हैं और किसी को बर्बाद नहीं करना चाहते, लेकिन “करों का भुगतान न करके जो घाटा पैदा हुआ है, उसकी भरपाई हर हाल में करनी होगी।”

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