माघ मेला मौनी अमावस्या के पावन पर्व के दौरान नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया। मेला प्रशासन ने श्री स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती, शिविर संचालक श्री शंकराचार्य आश्रम शाकम्भरी पीठ सहारनपुर एवं बद्रिकाश्रम हिमालय सेवा शिविर, मनकामेश्वर मंदिर प्रयागराज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।प्रशासन के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन आपात परिस्थितियों के लिए आरक्षित त्रिवेणी पान्टून पुल को तोड़ते हुए संगम अपर मार्ग से बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बग्घी पर सवार होकर पुल नंबर-02 पर लगे बैरियर को पार करते हुए भीड़ के साथ संगम नोज की ओर जाने का प्रयास किया गया। जबकि मेला पुलिस एवं प्रशासन द्वारा संगम क्षेत्र में किसी भी प्रकार के वाहन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा लाउडस्पीकर और वायरलेस के माध्यम से बार-बार की जा रही थी।
प्रशासन का कहना है कि उस समय संगम क्षेत्र में स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। उक्त क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील होने के कारण वाहन प्रवेश से भगदड़ और जनहानि की आशंका बनी हुई थी। इसके बावजूद बग्घी सहित वाहन निषिद्ध क्षेत्र तक पहुंचने का प्रयास किया गया और रोकने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे भीड़ प्रबंधन में मेला पुलिस और प्रशासन को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त कृत्य से मौनी अमावस्या के दिन माघ मेला की व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं और लाखों स्नानार्थियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।
इसके साथ ही प्रशासन ने आरोप लगाया है कि स्वयं को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड आदि लगाए गए हैं, जबकि इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगी हुई है, जो अवमानना की श्रेणी में आता है।मेला प्रशासन ने संबंधित संस्था को 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में शिविर को दी जा रही भूमि एवं सुविधाएं निरस्त कर दी जाएंगी और भविष्य में मेला क्षेत्र में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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