संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल एक प्रदेश नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपराओं का जीवंत केंद्र है। काशी की पावन भूमि पर स्थित यह प्रदेश भगवान श्रीराम की मर्यादा, श्रीकृष्ण के प्रेम और मोक्षदायिनी गंगा की धारा से समृद्ध है।कुलपति ने बताया कि 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश को भारत गणराज्य के एक राज्य के रूप में घोषित किया गया था। काशी में वर्ष 1791 में स्थापित संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की एक प्राचीन एवं महत्वपूर्ण संस्था है।
उन्होंने सभी से प्रदेश के विकास और प्रगति के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही भाषण एवं गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।भाषण प्रतियोगिता में “उत्तम प्रदेश, अग्रिम प्रदेश” विषय पर मयंक कुमार ने प्रथम, आयुष शर्मा ने द्वितीय, अतुल पांडेय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि अभिषेक पांडेय को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
गीत प्रतियोगिता में पंकज डिमरी एवं विशाल उपाध्याय ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं निशांत शुक्ल द्वितीय, शिवम शुक्ल तृतीय तथा अक्षय दीप को सांत्वना पुरस्कार मिला।कार्यक्रम का संचालन सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ शिक्षक, अधिकारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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