महिला पत्रकार रुचि तिवारी ने आरोप लगाया है कि उन्हें न केवल रेप और ‘नेक्ड परेड’ की धमकियां दी गईं, बल्कि ब्राह्मण होने के कारण निशाना बनाते हुए उनके साथ मारपीट भी की गई। तिवारी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि यह हमला उनकी पेशेवर पहचान और जातीय पृष्ठभूमि—दोनों को आधार बनाकर किया गया।
क्या हैं आरोप?
रुचि तिवारी के मुताबिक, हाल ही में एक रिपोर्टिंग असाइनमेंट के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि:
• उन्हें जातिसूचक टिप्पणियां सुनाई गईं,
• रेप और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की धमकियां दी गईं,
• और शारीरिक हमला कर डराने की कोशिश की गई।
तिवारी का कहना है कि हमलावरों ने स्पष्ट तौर पर उनकी जाति का जिक्र करते हुए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
पुलिस में शिकायत
पीड़िता ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रिया
घटना के सामने आने के बाद कई पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों ने इसकी निंदा की है। उनका कहना है कि:
• पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए,
• जाति और लिंग के आधार पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती,
• और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
महिला सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल यह घटना एक बार फिर महिला पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल और जमीनी स्तर—दोनों पर महिला पत्रकारों को बढ़ती धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, रुचि तिवारी को सुरक्षा प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है।

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