वाराणसी में हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत् 2083 के पावन अवसर पर शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती की उपस्थिति में सनातनी पंचांग का लोकार्पण किया गया।कार्यक्रम के दौरान सुबह की बेला में बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए सामूहिक रूप से सूर्य नमस्कार किया। इसके पश्चात विधि-विधान से मां गंगा का पूजन किया गया। घाट पर सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गंगा आरती की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
बटुकों द्वारा किए गए सूर्य नमस्कार और गंगा पूजन ने सनातन परंपरा की झलक प्रस्तुत की, वहीं श्रद्धालुओं ने गंगा की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान शंखनाद, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी से घाट का दृश्य अत्यंत दिव्य दिखाई दिया।इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने अपने संबोधन में नव संवत्सर को संकल्प और साधना का काल बताते हुए गौ-रक्षा, धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने गंगा की पवित्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।नववर्ष के इस शुभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने काशी की आध्यात्मिक परंपरा, वैदिक संस्कृति और आस्था को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

