संकटमोचन संगीत समारोह में शिवमणि का अनोखा अंदाज़—बाल्टी, शंख और घंट-घड़ियाल की ध्वनियों से सजी मेंडोलिन-ड्रम जुगलबंदी ने बांधा समा

वाराणसी। प्रसिद्ध संकटमोचन संगीत समारोह में मंगलवार रात शास्त्रीय और प्रयोगधर्मी संगीत का अनोखा संगम देखने को मिला। मेंडोलिन और ड्रम की जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं मशहूर पर्कशन वादक शिवमणि ने अपने अनूठे अंदाज़ से कार्यक्रम में ऊर्जा भर दी।शिवमणि ने पारंपरिक वाद्यों के साथ-साथ बाल्टी, शंख, घंट और घड़ियाल जैसे असामान्य उपकरणों का इस्तेमाल कर संगीत की नई ध्वनियाँ रचीं। उनकी प्रस्तुति में लय, ताल और नवाचार का अद्भुत संतुलन देखने को मिला, जिसने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

मेंडोलिन की मधुर तान और ड्रम्स की तेज़ बीट्स के बीच हुई जुगलबंदी ने मंच पर एक अलग ही वातावरण तैयार किया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।संकटमोचन मंदिर परिसर में आयोजित इस वार्षिक समारोह में देश-विदेश से संगीत प्रेमी और कलाकार शामिल होते हैं। यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को जीवित रखने के साथ-साथ नए प्रयोगों को भी मंच प्रदान करता है।कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कलाकारों का सम्मान किया और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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