वाराणसी में एनएचएम के संविदा कर्मचारियों का सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। कर्मचारी नियमितीकरण, समान काम के लिए समान वेतन और कैशलेस इलाज की सुविधा देने की मांग कर रहे हैं। धरने में कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर पहुंचीं। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में काम कर रहे हैं, लेकिन नियमित कर्मचारियों के मुकाबले उन्हें कम वेतन और सुविधाएं मिलती हैं।
संविदा पर 12 साल से नर्सिंग ऑफिसर के पद पर काम कर रहीं रूपा ने बताया कि नियमित कर्मचारियों के साथ समान काम करने के बावजूद उनकी सैलरी में काफी अंतर है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सेवाएं दीं, लेकिन उन्हें समान अधिकार नहीं मिले। वहीं, आठ साल से काम कर रहीं एक महिला कर्मचारी ने बताया कि कम वेतन और दो से तीन महीने तक वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की फीस, घर का खर्च और कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है। कर्मचारियों के मुताबिक, कई लोग 15 साल से संविदा पर काम कर रहे हैं, फिर भी उनका नियमितीकरण नहीं हुआ है।
संविदा कर्मचारी संघ के वाराणसी जिलाध्यक्ष संदीप सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगें हैं—नियमितीकरण, समान काम के लिए समान वेतन और कैशलेस इलाज की सुविधा। उन्होंने कहा कि कम वेतन के कारण कर्मचारियों को परिवार चलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने में परेशानी हो रही है। कर्मचारियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। रविवार को कर्मचारी घर पर रहेंगे, जबकि सोमवार को लखनऊ के इको गार्डन में धरना देंगे।


