मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वाराणसी में वकीलों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ और ‘लोकतंत्र का हत्यारा’ जैसे नारों वाले पोस्टर दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने करीब 13.5 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि, चुनाव आयोग इस आंकड़े को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट कर चुका है कि इसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं की श्रेणियां शामिल हैं।
प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए विरोध का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके संबंध में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हटाए गए लोग भारतीय नागरिक नहीं थे तो इसकी प्रक्रिया क्या रही और यदि वे पात्र भारतीय नागरिक थे तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाने का आधार क्या था।
वकीलों और प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की न्यायिक जांच, पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है तथा इन मुद्दों को लेकर उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा। हाल के दिनों में SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक तथा कानूनी स्तर पर भी बहस तेज हुई है। सुप्रीम कोर्ट में भी मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई हुई है, जिसमें SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।


