वाराणसी के रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में सोमवार, 19 अक्टूबर को लंका युद्ध के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। इस दौरान लक्ष्मण-शक्ति, कुंभकर्ण वध और रावण-विभीषण संवाद की लीला दिखाई गई। विजयादशमी से एक दिन पहले मंचित इन प्रसंगों में भगवान श्रीराम की सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध की घटनाओं को दर्शाया गया।
लीला के दौरान मेघनाद के वीरघातिनी बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत पहुंचे। संजीवनी मिलने पर लक्ष्मण जी के प्राण बचने का प्रसंग मंचित हुआ। इसके साथ ही रावण द्वारा कुंभकर्ण को नींद से जगाने और युद्ध में भगवान श्रीराम के हाथों कुंभकर्ण वध की लीला का भी मंचन किया गया।
वहीं, रावण और विभीषण के बीच संवाद में अधर्म और नीति का प्रसंग सामने आया। विभीषण ने रावण को गलत मार्ग छोड़कर सही निर्णय लेने की सलाह दी, लेकिन रावण ने उनकी बात नहीं मानी। रामनगर रामलीला की परंपरा के अनुसार, विजयादशमी से पहले इन प्रसंगों का मंचन लंका युद्ध के निर्णायक मोड़ को दर्शाता है। मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर रामलीला में आगे के प्रमुख प्रसंगों की ओर दर्शकों की निगाहें रहेंगी।


