महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हॉस्टल आवंटन और बीपीएड-एमपीएड प्रवेश प्रक्रिया को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल की सूची में नाम आने और फीस जमा कर रसीद मिलने के बाद भी कई विद्यार्थियों को आवंटित कमरों में रहने नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ कमरों पर पहले से ही दूसरे लोगों का कब्जा है। छात्रों ने कमरों के आवंटन में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप और भेदभाव की शिकायत करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की।
छात्र शिवम यादव के मुताबिक, हॉस्टल आवंटन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन और चीफ वार्डन की है, लेकिन शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर विद्यार्थियों को कार्रवाई और जेल भेजने की धमकी देने जैसी बातें कही गईं। वहीं, बीपीएड-एमपीएड की प्रवेश प्रक्रिया में भी छात्रों ने गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों के अंकों में बदलाव दिखाई दिया। इसके अलावा, खेल प्रमाणपत्रों के अंक नहीं जुड़ने और परीक्षा की वीडियोग्राफी नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों में गुरुदत्त गुप्ता और आनंद यादव ने अपनी शिकायतें रखते हुए खेल उपलब्धियों तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंकों की दोबारा जांच कराने की मांग की। आनंद यादव ने दावा किया कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और मेरठ व लखनऊ में खेलने के बावजूद उन्हें अपेक्षा से कम अंक मिले। छात्रों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और हॉस्टल आवंटन से लेकर प्रवेश परीक्षा तक के मामलों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।


