सनातन धर्म की प्राचीन वैदिक परंपरा को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से हनुमान घाट स्थित श्री कांची कामकोटि पीठम में श्रीशुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा का कंठस्थ दंडक्रम पारायण आयोजित किया जा रहा है। महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान, पुणे और समर्थाद्वैत वेदपाठशाला, त्र्यम्बकेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे इस दुर्लभ अनुष्ठान का उद्देश्य वेदों की मौखिक परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखना है।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार भी इस धार्मिक एवं सांगठनिक आयोजन में शामिल होने वाराणसी पहुंचे। आयोजन के संबंध में बताया गया कि दंडक्रम पारायण वेद पाठ की अत्यंत कठिन विधा है। इसमें वैदिक मंत्रों के शब्दों का विशेष क्रम और नियमों के अनुसार बिना किसी त्रुटि के कंठस्थ पाठ किया जाता है।
इस अनुष्ठान में युवा पारायणकर्ता अद्वैत शैलेंद्र काकड़े और समर्थ शैलेंद्र काकड़े अपनी शुद्ध एवं प्रभावशाली प्रस्तुति से विद्वानों को प्रभावित कर रहे हैं। काशी के वेदविद्वान भी उनके कठिन वैदिक पाठ की सराहना कर रहे हैं। आयोजन में वेदमूर्ति महादेव घनपाठी, वेदमूर्ति केदार घनपाठी और वेदमूर्ति अनंत घोडेकर जी महाराज सहित कई विद्वानों का सानिध्य और मार्गदर्शन मिल रहा है। आयोजन का मूल संकल्प 'रक्षार्थं वेदानाम्' अर्थात वेदों की रक्षा करना है।
आयोजकों का कहना है कि आधुनिक समय में कंठस्थ वैदिक परंपराओं को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी में वेदों के प्रति रुचि बढ़ेगी और सनातन संस्कृति की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने काशीवासियों और सनातन धर्मावलंबियों से हनुमान घाट स्थित कांची मठ पहुंचकर इस वैदिक अनुष्ठान का श्रवण करने की अपील की।

