झारखंड में सक्रिय प्रतिबंधित माओवादी संगठन टीएसपीसी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। संगठन के पूर्व प्रमुख बृजेश गंझू की मौत के बाद उसकी पत्नी ऊषा अब इसकी गतिविधियों को संभाल रही है। 30 लाख रुपये के इनामी बृजेश की 20 सितंबर को यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मौत हुई थी। इस बदलाव की जानकारी मिलने पर यूपी एटीएस ने झारखंड एटीएस के साथ जांच तेज कर दी है। एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य संगठन के नेटवर्क और आर्थिक गतिविधियों पर लगाम लगाना है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, संगठन के सदस्य लेवी वसूली के लिए सेशन और जांगी जैसे ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे, जिन्हें भारत सरकार ने 2023 में प्रतिबंधित किया था। बृजेश की संपत्ति, कमाई और निवेश से जुड़े मामलों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच में परिवार के सदस्यों के बीच धन के बंटवारे और कोलफील्ड्स कंपनी में नौकरी पाने के बावजूद काम पर नहीं जाने वाले लोगों की जानकारी सामने आई है। एजेंसी ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर रही है। वहीं, लेवी की रकम ऊषा तक पहुंचाने वाले एक व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
बृजेश गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था और अलग-अलग नामों से अपनी पहचान छिपाता था। उसकी गिरफ्तारी पर झारखंड सरकार और एनआईए ने कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। मुठभेड़ के दौरान उसके पास से नकदी, एक कार्बाइन, दो पिस्टल और कारतूस बरामद हुए थे। उस पर हत्या, अपहरण, रंगदारी और आगजनी समेत लगभग 50 आपराधिक मामले दर्ज थे। अब एजेंसियां संगठन के नए नेतृत्व, लेवी वसूली और इससे जुड़े लोगों की भूमिका पर फोकस कर रही हैं।

