स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों ने आधुनिक भारत का निर्माण किया है। उन्होंने स्वदेशी और स्वराज्य की बात कही। आज भारत में जब बहुराष्ट्रीय कंपनियो के प्रचार-प्रसार के कारण बाजारवाद जड़ अपनी जमा रहा है, परिवार टूट रहे हैं, तब स्वामी दयानंद सरस्वती की विचार साधना के बल पर ही इस राष्ट्र की संस्कृति को बचाया जा सकता है। यह विचार अजय कुमार उपाध्याय ने व्यक्त किया। वे हिंदी विभाग काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे । हिन्दी विभाग काशी हिंदू विश्वविद्यालय में स्वामी दयानंद सरस्वती के 200 वें जन्म वर्ष के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी 'स्वराज, स्वधर्म के संरक्षण की परंपरा: स्वामी दयानंद सरस्वती का प्रदेय (विशेष संदर्भ: हिन्दी भाषा व साहित्य) का आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रुप में मणिशंकर पांडेय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती की शिक्षा का प्रभाव बहुत व्यापक रहा है। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अजीत कुमार पुरी, सहायक प्रोफेसर, हिंदी विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी ने संगोष्ठी का संचालन किया। इस संगोष्ठी में प्रो. प्रभाकर सिंह,नीरज खरे, वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, शांतनु त्रिपाठी आदि के साथ में बड़ी संख्या में शिक्षकों, छात्र, छात्राओं की भागीदारी रही।
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